ADHD – A Tormenting illness!

हिलता डुलता, दौड़ता भागता।
चलने से पहले वो दौड़ लगाता।
चंचल मन, और चंचल काया।
हर फ़ोटो में हिलता आया।
फैंका फाँकी, उठा पटकना।

लड़ते भिड़ते क्रोध में रहना।
ध्यान लगाना हो ना पाना।
पुस्तक पाठ समझ ना आना।
धीरे धीरे क्रोध बन गया अंदर की घबराहट।
मन विषाद सा, धूमिल, बंजर।
कोई कहता तूफान सा बर्बर।
कोई कहता dull है या duffer।
बरसे ताने उत्तर दक्षिण।
टीचर हो या मम्मी पापा, हर एक की आँख में किरकिर चुभता।
बेंत, हाथ, और क्लास निकाला।
सब बच्चों ने भी हंस डाला
रहना लगा अकेला फिर वोह।

 

मन था विचलित फिर भी हरपल।
नशा उठा कर मांगे शीतलपन।
जर्जर सा झरता हर पल ये मन।
सबको अच्छा लगता बचपन का चंचल।
पर अति चंचलता ना सुंदर बचपन।
रोग है मानो ये अतिचंचलता, करो निदान, इजाज कराओ।
बालक के हाथों को थामो, जाने ना दो गलत रास्ता।
ये रोग, सही हो सकता है।
धीरज धर करो संघर्ष अगर।
सही दिशा और दवा का मिश्रण।
हो सकता जीवन सुरगम।